कन्या भ्रूणहत्या नहीं यह समाज की आत्महत्या है : भारत भूषण वर्मा
- Monday, 21 May 2012
- Written by India Vision 24
करनाल, (इंडिया विजन) : कारवां-ए-अदब की बैठक में आज साहित्यकारों की महफिल सजी। कार्यक्रम की अध्यक्षता सरिता आर्य व मंच संचालन आचार्य महावीर शास्त्री ने किया। इस दौरान डा. एसके शर्मा ने कहा कि दर्द की रोशन लकीरे रोशनी देती रहे, आंख में फिर आंसुओं की कहकशां ना हो। ओमप्रकाश उल्फत ने कहा कि खत्म होने को ही आते नहीं गम, ना जाने मौत की कितनी उम्र है।
भारत भूषण वर्मा ने कहा कि अजन्मी की पुकार सुनो क्या यह चीख मिथ्या है? यह कन्या भ्रूणहत्या नहीं यह समाज की आत्महत्या है। साविर खान ने कहा कि कभी महरमा नुजूम से कभी कहकशां से गुजर गया, जो तेरे ख्याल में चल पड़ा मैं कहां-कहां से गुजर गया। सरिता आर्य ने कहा कि आज चोर ही मचाते शोर है, बेगुनाहों को बताते चोर है। नरेंद जिज्ञासु ने कहा कि जरा नजरों से कह दो तुम तो दिल को चैन आ जाए। इस अवसर पर राहुल आर्य, हरबंस पथिक, डा. केके गांधी, केएन पाहवा, नरेंद्र कत्याल, अंग्रेज सिंह, पीआर मल्होत्रा ने भी अपनी रचानाएं प्रस्तुत की।













